शुक्रवार, 29 जुलाई 2016

क्या कभी नहीं पकड़ा जाएगा मुंबई हमले का गुनहगार

मुंबई हमले के बाद देश में जितनी भी आतंकी वारदातें हुईं ज्यादातर में आतंकियों का हैंडलर पाकिस्तान में बैठा उनका आका हाफिज सईद था। सीमा पार से वह आए दिन घुसपैठ, हमले और कश्मीर में अलगाववादियों को मदद पहुंचा रहा है पर आज तक भारत उसे पकड़कर सजा नहीं दे सका।  2011 में अमेरिकी कमांडो ने रात के अंधेरे में अचानक पाकिस्तान के एबटाबाद में सर्जिकल स्ट्राइक कर अमेरिका के सबसे बड़े दुश्मन अल कायदा सरगना ओसामा बिन लादेन का काम तमाम कर दिया था। इसके बाद भारत की ओर से भी ऐसी ही कार्रवाई की उम्मीद की गई पर आज भी मुंबई हमले का गुनहगार हाफिज सईद पाक में खुलेआम घूम रहा है। वह भारत के खिलाफ जहर उगल रहा है पर हम कुछ नहीं कर पा रहे। वह लगातार भारत के लिए खतरा बना हुआ है।
कश्मीर में आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद लोगों को भड़काने और अलगाववादियों तक आर्थिक मदद पहुंचाने में भी उसका हाथ है। खुफिया रिपोर्ट है कि अमेरिका से मिली मदद के 100 करोड़ रुपये पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई इन्हीं आतंकियों के जरिए कश्मीरी अलगाववादियों तक पहुंचा रही है। इनका मकसद है कि कश्मीर में कैसे भी अलगाव की आग भड़काए रखी जाए। बुरहान के इनकाउंटर पर बाकायदा हाफिज सईद और सलाहुद्दीन जैसे देश के दुश्मनों ने मिलकर नमाज-ए-जनाजा पढ़ा। पीओके में सईद ने अपने कैंप खोल रखे हैं। इन लोगों ने कश्मीर में युवाओं को उकसाया और जवानों पर पत्थर फेंकवाया। इन पत्थरबाजों के बीच में आतंकी भी भेजे गए जिन्होंने ग्रेनेड भी दागे। इससे साफ है कि हाफिज सईद की जिंदगी का मकसद ही भारत को अस्थिर करना है ऐसे में कश्मीर में अमन बहाली के लिए इस दहशतगर्द को सबक सिखाना जरूरी हो गया है। पर सवाल उठता है कैसे?
पाकिस्तान इसे सौंपने की बात तो दूर, कार्रवाई भी नहीं करेगा। मुंबई हमले मामले की कोर्ट में चल रही सुनवाई का हश्र हम देख ही रहे हैं। रेड कॉर्नर नोटिस का कोई मतलब नहीं क्योंकि हाफिज सईद पाकिस्तान छोड़कर कहीं बाहर जाने वाला नहीं है। खुफिया ऑपरेशन में उसे ढेर कर पाना मुश्किल है क्योंकि लाहौर के पास मुरीदके में जहां वह रहता है उसकी अपनी आतंकी जमात लश्कर-ए-ताइबा के गुर्गे सुरक्षा देते हैं। एक विकल्प सर्जिकल स्ट्राइक का है यानी खुफिया सूचना पर अचानक पूरी प्लानिंग के साथ धावा बोलकर इस दहशतगर्द का सफाया कर दिया जाए पर अमेरिका की तरह भारत इस ऑपरेशन को अंजाम नहीं दे सकता।
अफगानिस्तान में अमेरिकी बेस से एबटाबाद तक के क्षेत्र में पाकिस्तान का एयर डिफेंस सिस्टम काफी कमजोर था। अमेरिकी कमांडो जिस ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर में आए थे वह राडार को पूरी तरह से चकमा दे सकता था। पास में पाक मिलिट्री एकेडमी थी, ऐसे में जब हेलीकॉप्टर की आवाज आने लगी और वह उतरा तो लोगों को लगा कि यह सेना का कोई प्रशिक्षण कार्यक्रम है क्योंकि वहां अक्सर सेना के विमान उड़ते रहते थे। दूसरी तरफ भारत को ऐसे मिशन के लिए अपने नए लाइट कांबैट हेलीकॉप्‍टर या एमआई-17 पर भरोसा करना होगा पर स्टील्‍थ टेक्नोलॉजी में अभी ये उतने दमदार नहीं हैं। भारत के पास अमेरिका जैसा ड्रोन भी नहीं है। अफगानिस्तान की सीमा को पाकिस्तान संवेदनशील नहीं मानता पर भारत की तरफ उसने मजबूत हवाई रक्षा प्रणाली तैनात कर रखी है। भारत से जैसे ही कोई विमान या हेलीकॉप्टर पाक सीमा में दाखिल होगा, झट से पहचान लिया जाएगा। ऐसे में भारतीय जवानों की जान खतरे में पड़ सकती है।
अमरिकियों ने करीब 18 महीने तक लादेन की निगरानी की थी और लादेन की सुरक्षा पुख्ता न होने की सूचना पर कार्रवाई की गई। जबकि हाफिज सईद कभी अकेला नहीं रहता है और उसका ठिकाना भी बदलता रहता है। वैसे भी उसे खुली छूट है तो वह घूम-घूमकर जिहाद के लिए चंदे इकट्ठे करता रहता है। पाकिस्तानी हुकूमत भी उसे सुरक्षा देती है। ऐसे में उसकी सटीक लोकेशन मिल पाना बेहद मुश्किल है। हालांकि पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह ने अमेरिकी ऑपरेशन के बाद संकेत दिया था कि भारत चाहे तो वह भी ऐसे ऑपरेशन को अंजाम दे सकता है पर हाफिज सईद के खिलाफ यह तरीका जोखिम भरा होगा। अक्षय कुमार की फिल्म बेबी में हाफिज सईद जैसे हमशक्ल को नाटकीय तरीके से भारत लाकर सलाखों के पीछे करने की कहानी दर्शकों को खूब पसंद आई थी पर रीयल लाइफ में यह काफी मुश्किल मिशन है।
हां, भारतीय कट्टरपंथी प्रचारक जाकिर नाईक इस काम में भारत सरकार की मदद कर सकते हैं। हाल में मदीना से प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने कहा था कि देशहित में फिदाईन हमला जायज है। नाईक चूंकि भारतीय हैं और सईद देश का दुश्मन तो क्यों न उनसे प्रेरित बांग्लादेश के दो दहशतगर्द की तरह जाकिर नाईक खुद ऐसा देशभक्त तैयार करें जो पाकिस्तान में जाकर हाफिज सईद को हमेशा-हमेशा के लिए मौत की नींद सुला सके। जाहिर है इस तरह का कदम सरकार उठाने से रही पर अगर नाईक यह मानते हैं कि बेगुनाहों का कत्ल करना गुनाह-ए-अजीम है तो उन्हें इस पर जरूर गौर करना चाहिए। वैसे भी जंग में तो सब जायज है और हाफिज सईद भारत को लगातार जंग की धमकी देता रहता है।
पाकिस्तान को भारत के बजाए अपने आंतरिक मामलों पर ज्यादा गौर करने की जरूरत है। संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर में जनमत का राग अलापने से पहले वह उस यूएन प्रस्ताव पर अमल करे जिसमें पीओके खाली करने की बात कही गई है। भारत के लिए भी अपनी शांति के लिए थोड़ी कूटनीतिक चाल तो बनती है।

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